भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को कहा कि चंद्रयान-3 के ‘लैंडर मॉड्यूल' ने चंद्रयान-2 के ‘ऑर्बिटर' के साथ संचार शुरू कर दिया है, और ‘लैंडर हजार्ड डिटेक्शन एंड एवाइडेंस कैमरा' (एलएचडीएसी) से ली गई चंद्रमा के सुदूर पार्श्व भाग की तस्वीरें जारी की हैं. इसरो ने रविवार को कहा कि चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल के बुधवार को शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर चंद्रमा की सतह पर उतरने की उम्मीद है. लैंडर के अंदर एक ‘रोवर' है.
राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने ‘एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘स्वागत है दोस्त! चंद्रयान-2 आर्बिटर ने औपचारिक रूप से चंद्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल का स्वागत किया. दोनों के बीच दोतरफा संचार स्थापित हो गया है. एमओक्स (मिशन ऑपरेशंस कॉम्पलेक्स) के पास अब लैंडर मॉड्यूल तक पहुंचने के लिए अधिक मार्ग हैं.''
एमओएक्स यहां इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में स्थित है.
चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के साथ चंद्रयान-3 के लैंडर में ‘इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क' (आईडीएसएन), बड़े एंटेना के नेटवर्क और इसरो द्वारा संचालित संचार सुविधाओं के साथ संचार करने की क्षमता है.
इसरो ने यह भी कहा कि चंद्रमा की सतह पर उतरने के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण बुधवार शाम पांच बजकर 20 मिनट से शुरू होगा.
चंद्रयान-2 मिशन 2019 में भेजा गया था. इस अंतरिक्ष यान में आर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल था. लैंडर के अंदर एक रोवर था. लैंडर चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे यह मिशन के ‘सॉफ्ट लैंडिंग' लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम रहा था.
इसरो ने 2019 में कहा था कि चंद्रयान-2 मिशन के आर्बिटर का सेवाकाल सात साल बढ़ गया है.
इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर ने कहा है कि चंद्रमा की सतह पर उतरने की प्रक्रिया बहुत जटिल है. उन्होंने कहा कि सफल लैंडिंग ग्रहीय अन्वेषण के इसरो के अगले चरण की शानदार शुरूआत करेगा. वह 2008 में चंद्रयान-1 मिशन को भेजे जाने के समय अंतरिक्ष एजेंसी के प्रमुख थे.
उन्होंने सोमवार को कहा, ‘‘यह (सॉफ्ट लैंडिंग) एक बहुत जटिल प्रक्रिया है. हम (चंद्रमा की सतह से ऊपर) अंतिम दो किलोमीटर में (चंद्रयान-2 मिशन में चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने के दौरान) बहुत करीब से चूक गये थे.''
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, कई चीजों पर एक साथ काम करना होगा...थ्रर्स्टर्स, सेंसर, अल्टीमीटर, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर आदि. कहीं भी कोई भी गड़बड़ी होने पर हम संकट में घिर सकते हैं.''
नायर ने कहा, ‘‘हमें सावधान रहना होगा और नजर रखनी होगी.''
नायर ने कहा, ‘‘हम (चंद्रमा की) सतह से जो आंकड़े एकत्र कर सकते हैं, वह कुछ खनिजों की पहचान करने में उपयोगी होगा...दुर्लभ खनिज, ...हीलियम-3 इत्यादि. यह भी जांचने का प्रयास किया जाएगा कि हम अन्वेषण या मानव उपस्थिति के लिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास किस प्रकार की व्यवस्था कर सकते हैं. यह (सफल सॉफ्ट-लैंडिंग) इसरो के ग्रह अन्वेषण के अगले चरण के लिए एक बड़ी शुरुआत होने जा रही है.''
इसरो के एक अन्य पूर्व प्रमुख के. सिवन ने कहा कि रूस के लूना-2 चंद्र मिशन की नाकामी का चंद्रयान-3 पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोसमोस ने रविवार को एक बयान में कहा कि अनियंत्रित कक्षा में प्रवेश करने के बाद लूना-25 अंतरिक्ष यान चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
सिवन ने कहा, ‘‘यह (चंद्रयान-3 मिशन) योजना के मुताबिक आगे बढ़ रहा. यह (सॉफ्ट लैंडिंग) योजना के अनुसार होगा. हम उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार (चंद्रयान-2) के उलट यह (सतह पर उतरने में) सफल रहेगा.''
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